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About This Club

Lets fight for our right to make our area and this country corruption free. Rights of the Common man, right of us

  1. What's new in this club
  2. Hon'ble members- Piece of land was granted by the Government of India to the soldier posthumously for his bravery . Respected soldier served the country when he was alive and ultimately dedicated his life for the cause of country. Our government redeemed his service by providing a disputed piece of land. Our corrupt leaders are accumulating huge wealth illegally and court is granting them bail and matter concerned with the martyr is awaiting adjudication as his family is common man's family.
  3. hi, i am arun from udupi.near my site on the public road someone built small houses. i have given complaint to tahasildar and he strongly written to municipality to remove the encroachment but municipality commitioner not taken any action....wht to do..
  4. भारत-चीन युद्ध के महत्व को समझने वाले जसवंत सिंह के नाम से सभी भली-भांति परिचित हैं. एलओसी पर जाने वाला हर सैनिक जसवंत गढ़ पर अपना मत्था टेक कर जाता है. यह वही जगह है, जहां राइफल मैन जसवंत सिंह ने अकेले मोर्चा लिया और तीन सौ से अधिक चीनी सैनिकों को खत्म किया.जहां एक ओर इस वीर भारतीय की वीरता के कसीदे पढ़े गए और उसे महावीर चक्र से नवाजा गया, वहीं उसके परिवार को पूरी तरह भुला दिया गया. युद्घ के पांच दशकों बाद भी इस वीर की मां उस जमीन के टुकड़े के लिए जूझ रही है, जो उसके बेटे की मौत के बाद उसे दिया जाना था.यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और इसका अंत अब तक नहीं यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और इसका अंत अब तक नहीं नजर आ रहा. जमीन का यह मामला भी दूसरी किसी जमीन के मामले की तरह ही है. फर्क सिर्फ इतना है कि जमीन का यह टुकड़ा वीरगति प्राप्त सैनिक की मां को दिया गया है.
  5. हाशिमपुरा की आरा मशीन वाली गली 1987 को कभी नहीं भूल पाएगी. इस सकरी-सी गली में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसकी रूह उस साल 14 अप्रैल को भड़के दंगे के जख्म से बरी हो. शब-ए-बारात के अवसर पर हाशिमपुरा में ढेर सारे लोग जमा हुए थे. पुलिस को बाकायदा बता दिया गया था. सड़क के दूसरी तरफ, बिना बताए ही एक और सार्वजनिक समारोह के लिए लाउडस्पीकर लगा दिए गए. शिकायत के जवाब में पुलिस ने आश्वासन दिया कि तकरीर खत्म हो जाने तक लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा, लेकिन लाउडस्पीकरों की आवाज धीरे-धीरे तेज होती गई. एक शराबी पुलिसकर्मी ने गोली चला दी. दंगा भड़क उठा. 13 लोगों की जान चली गई. दंगे की आग तीन महीने तक सुलगती रही. छोटी-सी दुकान के बाहर बैठे जमालुदीन कहते हैं, 'मेरे 17 साल के बेटे कमरुद्दीन को गोली मार दी गई. पीएसी ने 40 युवकों को गोली मार दी और उनकी लाशें गंग नहर में फेंक दीं.' इस नरसंहार के बारे में इनके परिवार वालों को अखबारों से पता चला. जमालुद्दीन कहते हैं, 'हमें अब भी इंसाफ का इंतजार हैं.'
  6. dear if this matter is in high court then it is really hard to answer what you want.
  7. मित्रो यहाँ पर अपने विचार व्यक्त करने की जगह की सीमितता को देखते हुए मै अपने विचार पूर्ण रूप से आपके सम्मुख नहीं रख पा रहा हू। मुझे और अधिक पढने के लिए नीचे दिए गए लिंक पे क्लिक कीजिये। धन्यवाद आपका अपना मित्र दुर्गेश aamaadmithecommonman.blogspot.in
  8. यह गांव जरूर है, मगर जरा दूसरी किस्म का. लगभग पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले इस गांव में योजनाबद्ध तरीके से बनी सड़कें और शानदार मकान यहां की उस आरामदेह जिंदगी का आईना हैं, जिसका दावा भारत का कोई दूसरा ग्रामीण इलाका नहीं कर सकता. यह गांव देश के किसी भी महानगर के नजदीक नहीं बसा है, फिर भी यहां किराना दुकानों की तुलना में बैंकों की संख्या ज्यादा है. इतना ही नहीं, यहां दिल्ली और मुंबई के पिछड़े इलाकों की तुलना में इतने ज्यादा शेयर दलाल मौजूद हैं, जिसकी किसी और गांव के लोग सिर्फ कल्पना कर सकते हैं. गुजरात में भुज-अंजार सड़क से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर भूजियो डूंगर (भूजियो पहाड़) पर स्थित माधापार नवा वास में आपका स्वागत है. यह गांव लेवा पटेलों की उद्यमशीलता और आर्थिक सफलता का अतुलनीय दस्तावेज है.यहां जरूरी बुनियादी ढांचे और सुविधाओं की कोई कमी नहीं. हर चीज सही ढंग से बनाई गई है. हर इमारत तीन मंजिला है, उससे ऊंची नहीं. कोई भी दुकान या मकान बेतरतीब ढंग से नहीं बनाया गया है. बिजली और पानी की आपूर्ति चौबीसों घंटे होती है.
  9. २ नवम्बर २००० को ससस्त्र बल विशेष अधिनियम का कहर एक बार फिर देखने को मिला, जब इम्फाल घाटी के मालूम कसबे में बस का इन्तेजार कर रहे करीब दस लोगो को भारतीय अर्धसैनिक बलों ने गोलियों से भून डाला था। मृत लोगो में १८ वर्षीय सिनम चंद्रमणि भी सामिल था जिसे १९८८ में राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। सिनम महज ४ साल का था, जब उसने एक बच्चे को डूबने से बचाया था। इस गोलीबारी में चद्रमणि का भाई रोबिन सिंह और उसकी आंटी भी मारे गए। इस घटना से हतप्रभ होके सामाजिक कार्यकर्ता इरोम शर्मीला ने ससस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम निरस्त करने के लिए आमरण अनसन करने का फैसला किया। २००० में जब शर्मीला ने अनसन शुरू किया, तीन दिन बाद उन्हें आत्महत्या करने के इल्जाम में गिरफ्तार कर लिया गया। तब से उन्हें जबरन भोजन दिया जा रहा है। इतने बरसो बाद लोग चंद्रमणि ओ भूल चुके है, लेकिन ससस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम के खिलाफ संघर्ष अब भी जारी है। तो आइये हम लोग सलाम करे शर्मीला जी के साहस और संघर्ष को जो आज कई लोगो के लिए एक मिसाल है।
  10. साल २०१० में भारतीय रिज़र्व बैंक ने विभिन्न मात्राओ के १६.५ बिल्लियन करेंसी नोट की छपाई पर २,३७६ करोड़ रुपये खर्च किये थे। इस बार यह लागत और भी बढ़ सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक के एक आंकड़े के मुताबिक एक हजार के एक नोट के उत्पादन पर अनुपातिक रूप से सबसे कम यानी ३.१७ रुँपये का खर्च आता है जबकि नोटों में सबसे छोटे पांच रुपये के नोट का उत्पादन खर्च सबसे ज्यादा ०.४८ रुपये आता है। वर्तमान में नोटों का उत्पादन लगातार बढ़ता जा रहा है। यह सब हमें अपने एक मित्र सुदेश काम्बले से पता चला जिन्होंने एक आर ० टी० आइ० इस बारे में पता करने के लिया डाला था । धन्यवाद सुदेश जी।
  11. मित्रो, ये मंच उन सब के लिए है जो अपने छेत्र को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना चाहते है। तो आइये हम सभी लोग एक छोटा सा प्रयास करे और इस ओर अपना योगदान दे । अपने छेत्र की कोई भी समस्या यहाँ हमसे बाटे और हम सब उस समस्या का मिल कर हल ढूंढेगे। आप सभी मित्र अपने अनुभव और जानकारी भी हमसे बात सकते है जो आप सोचते है की वो बात हम सबके काम आ सकती है। आपका अपना मित्र दुर्गेश पाण्डेय, धन्यवाद।
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