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Bimal Kumar Khemani

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About Bimal Kumar Khemani

  • Rank
    Devoted Member
  • Birthday 08/03/1945

Personal Information

  • Location
    ALIGARH
  • Interests
    reading
  • Occupation
    retired from business
  1. Now Bad days are ahead. SIC or CIC will be battle ground for advocates
  2. how to get info from kanpur police

    Please go through the following paper clipping
  3. how to get info from kanpur police

    Just address your application in the name of PUBLIC INFORMATION OFFICER, [TABLE=width: 539, align: center] [TR] [TD]Superintendent of Police Kanpur Dehat[/TD] [TD]spknd-up@nic.in[/TD] [/TR] [/TABLE]
  4. how to get info from kanpur police

    Rajesh U.P. Police has designated all ASP as the PUBLIC INFORMATION OFFICER and SSP as FIRST APPELATTE AUTHORITY
  5. How do you name an RTI Activist?

    Excellent Yogi an RTI activist must posses the skill to see that with his activities The system should not be collapsed
  6. Dear Sri Haira

    I would like to have the details of order of Punjab High Court, which was reported on 04-11-2010, regarding the issue that a PIO could not appeal against an order through the state and should rather come in personal capacity

  7. Dear Sri Haira

    I would like to have the details of order of Punjab High Court, which was reported on 04-11-2010, regarding the issue that a PIO could not appeal against an order through the state and should rather come in personal capacity

  8. Wish to start NGO for RTI Users.

    Dr. M. Faiyazuddin I invite you to join RTI COUNCIL OF U.P.
  9. Wish to start NGO for RTI Users.

    Dear Friends In Uttar Pradesh we have started RTI COUNCIL of U.P. All from U.P. are requested to kindly contact through private message
  10. Wish to start NGO for RTI Users.

    Good Morning Fiyazuddin I would suggest to meet me personally
  11. UP: A 'minor' reason for rejecting RTI query

    Dear Friends I would like all my friends to please go through the decision and then have an idea To me the IC has given a wise decision and also provided an opportunity to the minor with her parents to appear before the commission.
  12. दिनांक २५ मई २०१०. महामहिम राज्यपाल उत्तरप्रदेश, राज भवन,, लखनऊ विषय : उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के कुछ आयुक्त सूचना अधिनियम २००५ की धार कुंद करने पर आमादा मान्यवर, भारत सरकार के संविधान निर्माताओं ने काफी जद्दोजहद एवं विभिन्न विचारधाराओं के मत धारको एवं संसद में लगातार काफी वर्षो की बहस के उपरांत , भारतीय जनता को सूचना अधिकार अधिनियम २००५ को पारित कराया , जिसका मूल उद्देश्य नागरिको को सशक्त बनाना, सरकार की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता , जबाबदेही का संवर्धन करना , और लोक तंत्र को वास्तविक रूप में जनता के लिए काम करने के लिए तैयार करना है i यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि एक जागरुक नागरिक , शासन के अभिकारको पर तुलनात्मक रूप से बेहतर निगरानी रख सकता है, और सरकार एवं उसके सहायक विभागों को अधिक जवाबदेय बनाने में सहायक हो सकता है i नागरिको के अलावा उसके स्वयंसेवी संगठन भी पारदर्शिता एवं जवाबदेयी के लिए अधिक संघर्षरत हो सकते है i उपरोक्त उद्देश्यों कि पूर्ति हेतु अलीगढ के जागरूक नागरिको ने ट्रेप ग्रुप के नाम से संगठन का गठन कर आम नागरिको को जागृत करने हेतु प्रयासरत है i जिसके अथक प्रयासों से कुछ सफलता भी प्राप्त हुई , लेकिन उत्तरप्रदेश शासन के सहायक विभाग एवं कुछ राज्य सूचना आयुक्तों के मनमाने एवं निरंकुश आचरणों के चलते, यह पारदर्शिता का कानून अपनी वास्तविक सफलता को पूर्ण रूपेण प्राप्त नहीं कर पा रहा है i राज्य सूचना आयुक्तों के आचरण से अन्य विभागीय अधिकारी निरंकुश होकर इस कानून का मखौल उड़ाते हुए भ्रष्टाचार में और अधिक संलिप्त हो रहे है i इस क्रम में यह संगठन ही नहीं प्रांत के अन्य संगठन एवं आम नागरिक भी अपने आप को हतोत्साहित महसूस कर रहे है i ट्रेप ग्रुप के कुछ सदस्य विगत १२-०५-२०१० को राज्य सूचना आयुक्त श्री वीरेंद्र कुमार सक्सेना के यहाँ करीब १२/१३ पुराने अपील के सम्बन्ध में उपस्थित हुवे , जिसका कटु अनुभव निम्न प्रकार है १. आयोग में ६ ठे तल पर उतरते ही सामने भेजे जाने वाली डाक का ढेर नजर आया , एवं उत्सुकतापूर्वक देखने से पाया गया कि बहु-संख्यक डाक जिनमे डाक जारी करने की तारीख १५-०४-२०१० लिख रखी थी एवं उन अपीलों कि सुनवाई हेतु १०/११/१२ मई कि तारीख लगी हुई थी , इस बाबत हमारे पूछ-ताछ करने पर वहां के सम्बंधित कर्मचारीगण हम से अभद्रता से पेश आये i जिन अपीलों कि सुनवाई हेतु १०/११/१२ मई की तारीख लगी हो उन्हें १२ मई को भेजने का कोई औचित्य नहीं है इसका सीधा मतलब तो यही निकाला जा सकता है कि आम नागरिको को किस तरह ज्यादा से ज्यादा तंग किया जाय जिससे वह सूचना मांगना छोड़ दे i २. माननीय आयुक्त महोदय ११.०० बजे ही आयोग में अपने कक्ष में पधारे और प्रारम्भ हो गया एक दीवानी अदालत का रूप i आयुक्त महोदय ने ५० अपीले २ घंटे में ही सुनवाई कर डाली , क्योंकि बहुसंख्यक अपीलकर्ताओ एवं सरकारी विभागों को नोटिस समय से नहीं पहुंचे , जिसके कारण ६५/७० प्रतिशत अनुपस्थिति रही i हमारी १२ अपीलों की सुनवाई में ही १ घंटे के करीब समय दिया गया, हमारे द्वारा रखे गए कानून सम्मत तथ्यों पर विचार ही नहीं किया गया ऐसा लग रहा था की माननीय आयुक्त महोदय ही जन सूचना अधिकारी की भूमिका का भी निर्वहन कर रहे है और मनमाने तरीके से हमारी अपीलों को नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतो की पूर्ण अवहेलना कर बड़ी बेदर्दी से निरस्त करते हुए विभिन्न राजकीय विभागों के पक्ष में निर्णित किया i ३. माननीय आयुक्त महोदय के यहाँ से बेआबरू होकर निकलने के पश्चात हम लोग नक़ल सवाल विभाग में अपने कुछ पुराने आदेशो कि नक़ल प्राप्त करने हेतु करीब १.४५ बजे गए , वहा कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं मिला एवं ज्ञात करने पर पता लगा कि भोजन अवकाश हो गया है एवं ३ बजे से पुनः कार्य प्रारम्भ किया जाएगा i खैर ३ बजे तक इंतज़ार के पश्चात काफी बड़ी संख्या में लोगो का हुजूम अपनी अपनी नक़ल लेने हेतु जमा था i जैसे तैसे हमारी बारी आई तो पता चला कि हमारे द्वारा ०३ मई एवं २२ अप्रैल २०१० को किये गए आवेदनों की नक़ल ही तैयार नहीं हुई , हमारे द्वारा तर्क किये जाने पर सम्बंधित बाबू का कथन था कि इतनी जल्दी नक़ल नहीं आती है, आप फिर नकल लेने के लिए आये i हमारे द्वारा दिनांक १२-०५-२०१० को दिए गए नक़ल सवाल हेतु आयोग की नियमावली के अनुसार लगाए गए टिकट लगे अपने पते सहित दिए गए लिफ़ाफ़े भी लेने से इनकार कर दिया और कहा कि अगर नक़ल प्राप्त करनी है तो आपको व्यक्तिगत रूप से लखनऊ आयोग में आना पडेगा I यह पूर्णतः स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न कोनो से व्यक्तिगत आकर काफी धन खर्च कर नक़ल सवाल प्राप्त करना लगभग असंभव सा कार्य है i शायद राज्य सूचना आयोग का कार्यालय यह चाहता है कि उनके निर्णयों के खिलाफ आगामी विधि सम्मत कार्यवाही निर्धारित समयावधि में न की जा सके i उपरोक्त लिखित वास्तविक तथ्यों से राज्य सूचना आयोग की कार्य प्रणालि सुस्पष्ट होती है कि १. आयोग में सुनवाई हेतु नोटिस समय से नहीं भेजे जाते है २. माननीयो कि कार्यप्रणाली किस तरह सूचना याचक एवं कानून विरोधी है ? ३. अपीलों के फैसले हो जाने के पश्चात भी निर्णयों की प्रति स्वतः ही सम्बंधित पक्षों को नहीं भेजी जाती, नतीजन किये गए फैसलों का अनुपालन भी नहीं हो पाता, जिससे पारदर्शिता का कानून स्वतः ही अपनी अधोगति को प्राप्त हो रहा है महामहिम से अनुरोध है कि , कृपया अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए राज्य सूचना आयोग के कार्य प्रणाली में सुधार कराने कि कृपा करे जिससे आम जनता का विश्वास इस कानून पर बना रहे एवं अनावश्यक समय और धन कि बरबादी को रोका जा सके इसके अतिरिक्त उक्त अधिनियम की मूल भावना अनुसार सूचना याचक को मांगी गई सूचना सहज में उपलब्ध हो सके धन्यवाद सहित, भवदीय ई. विक्रम सिंह विनोद वार्ष्णेय अध्यक्ष ट्रेप ग्रुप संयोजक, ट्रेप ग्रुप ट्रेप TRANSPARENT RELIABLE ACCOUNTABLE PEOPLE’S MOVEMENT, a GROUP of RTI activists
  13. i have also received the similiar reply
  14. hum us desh ke waasi hai jis desh me ganaga bahati hai
  15. This Group run a regular RTI clinic and provide free consultations to all at their office from 9.00 a.m. to 5.00 p.m.

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