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rajrathodbvn

Question

rajrathodbvn

हेल्लो दोस्तों !

मैं गुजरात से हूँ और स्टेट गवर्मेंट का एम्प्लोयी हूँ ! मेरी पोस्ट के दौरान एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट ने मेरी फर्ज रूकावट की ! हमने उसके खिलाफ पुलिस में कम्प्लेंट किया तो उसने मुझे और मेरे सह कर्मचारियो को बदनाम करने के लिये एक न्यूज़ चैनल में हमें बदनाम किया ! उसने जो भी इन्टरव्यू में कहा वो सब गलत है ! उसने हमारी मानहानि की तो हमने कोर्ट में उसके खिलाफ IPC 499, 500 के तहत केस किया ! दोनों केस में कोर्ट ने प्रथम दर्शनीय केस सही लगने के बाद उसके खिलाफ समन्स इस्स्यु किया है ! अभी दोनों केस कोर्ट में है ! इसी प्रोसेस के दौरान हमारी दूसरी जगह ट्रांसफर हो गई है जो की एक सामान्य प्रोसेस है ! अब वो आर.टी.आई.एक्टिविस्ट हमारी पूर्व कचेरी में आर.टी.आई. एप्लीकेशन करके कुछ हमारे रिलेटेड इन्फोर्मेशन पाना चाहता है ! हमने PIO को त्राहित पक्षकार के तहत एप्लीकेशन करके कोर्ट केस के बारे में बताया और इन्फोर्मेशन देने से इनकार किया ! PIO को हमारी बात सही लगी और उसने 8(1)h का रीजन देकर इन्फोर्मेशन देने से मना कर दिया ! उसने अपील की तो फर्स्ट एप्लेट ने भी PIO को समर्थन करते हुए माहिती देने से इनकार किया !

मेरा सवाल ये है कि वो आर.टी.आई. एक्टिविस्ट सही इन्सान नहीं है ! उसने जो हमारी मानहानि की है उसे सही साबित करने के लिये वो इन्फोर्मेशन के साथ जुड़े इन्सानों को हानि पहुंचा सकता है क्यूँकी उसने पहले भी ऐसा किया है ! तो क्या वो इन्फोर्मेशन कमीशन में जाये या कोर्ट में तो क्या होगा ! आप सब दोस्तों की इस बारे में क्या राय है !

आभार !!

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2 answers to this question

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Sunil Ahya

पहली बात यह की, rti एक्ट के सेक्शन ७(१) के अनुसार, इनफार्मेशन केवल और केवल सेक्शन ८ और ९ में दिए हुए कारणों के तहत ही मना की जा सकती है

और, दूसरी बात यह की rti एक्ट के सेक्शन ६(२) के अनुसार, इनफार्मेशन मांगने वाले से यह नहीं पूछा जा सकता के उसे यह इनफार्मेशन क्यों चाहिए, यानिकि दूसरे शब्दों में, जानकारी मांगने वाले को उसका मकसद नहीं पूछा जा सकता है.

इन ऊपर दिए हुए दो बिंदुओ (points) के अनुसार, अगर मांगी हुई जानकारी सेक्शन ८ या ९ के दिए हुए कारणों में नहीं बैठती, तो कमीशन जानकारी देनेका आदेश देगी

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Prasad GLN

You have commenced the fight, now both are playing games in a Court of law with RTI ball, there is no need for seeking any opinions from members. Let the Court & information commission decide on merits relevant to the issue before them. No one can do any harm to any one with such information unless there is criminal nature involved in such information. RTI is never a man eater.

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